Wednesday, June 19, 2013

Copy of FIR in Defamation case



सेवा में, 
थाना प्रभारी,
थाना गोमतीनगर,
जनपद लखनऊ 

महोदय,
     कृपया निवेदन है कि मैं डॉ नूतन ठाकुर पत्नी श्री अमिताभ ठाकुर, निवासी  5/426, विराम खंड, गोमती नगर, लखनऊ हूँ. मैंने अपने पति श्री अमिताभ ठाकुर तथा एक अन्य व्यक्ति के साथ मिल कर व्यापक जनहित में दिनांक 06/11/2012 को विभिन्न अधिकारियों को सहारा क्यू शॉप आदि के सम्बन्ध में एक शिकायती पत्र भेजा था.     
हमें इस सम्बन्ध में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज, महाराष्ट्र, मुंबई के पत्र दिनांक
21/01/2013  के साथ डाइरेक्टर, सहारा क्यू शॉप यूनिक प्रोडक्ट्स रेंज लिमिटेड, रजिस्टर्ड कार्यालय- होटल सहारा स्टार, निकट डोमेस्टिक एयरपोर्ट, विले पार्ले ईस्ट, मुंबई-400099 का एक पत्र दिनांक 21/12/2012 प्राप्त हुआ. इस पत्र में उन्होंने हमारी शिकायतों को गलत बताया. हमें इन कथनों पर कोई आपत्ति नहीं है क्योंकि मेरी शिकायतों से असहमत होना उनके लिए स्वाभाविक है.    
जिस बिन्दु पर हमें सख्त ऐतराज़ हुआ था वे डाइरेक्टर साहब के ये शब्द थे-“
The complainants are trying to take help of such judgement to create biases in the Regulators so that complainant may achieve their goals for their vested reasons to get Companies operations de-established. These complainants are probably acting as White-collar extortionist.” अर्थात शिकायतकर्ता अधिकारियों के मन में भ्रान्तिपूर्ण तरीके से अपने निहित स्वार्थों/कारणों से पूर्वाग्रह पैदा कर कंपनी के कार्यों को अस्थिर करना चाहते हैं. ये शिकायतकर्ता संभवतः सफेदपोश उगाहीकर्ता के रूप में कार्य कर रहे हैं.     
इन शब्दों को मानहानि कारक मानते हुए मैंने और मेरे पति ने दिनांक
 01/02/2013  के अपने पत्र द्वारा डाइरेक्टर साहब से अपनी कही बातों पर स्थिति स्पष्ट करने अथवा निशर्त माफ़ी मांगने का आग्रह किया. कोई उत्तर नहीं आने पर पुनः अपने पत्र दिनांक 02/05/2013  से इस हेतु अतिरिक्त समय दिया. अब वह निर्धारित अवधि दिनांक 31/05/2013 भी बीत चुकी है और प्रतिवादी की तरफ से अब तक कोई भी उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है. मैं सम्बंधित पत्रों की छायाप्रति साक्ष्य के रूप में संलग्न कर रही हूँ.
यद्यपि प्रतिवादी द्वारा भेजे गए पत्र की प्राप्ति के समय से ही अपराध कारित हो गया था पर हमने पहले प्रतिपक्ष को अपनी बात कहने या प्रकरण में माफ़ी मांगने का अवसर देना उचित समझा था कि ताकि यदि अनजाने में कोई बात हो गयी हो तो उसका निराकरण हो जाये. प्रतिवादी की लगातार चुप्पी यह स्थापित करती है कि वे अपने शब्दों पर कायम हैं जो प्रथमद्रष्टया हमारे ख्याति की अपहानी होने के नाते धारा
499 आईपीसी में परिभाषित मानहानि का अपराध बनता दिखता है जिसकी सजा धारा 500 आईपीसी में दी गयी है, जो असंज्ञेय अपराध है, अतः आपसे निवेदन है कि उपरोक्त तथ्यों के आधार पर धारा 500 आईपीसी के अंतर्गत एनसीआर पंजीकृत करने की कृपा करें.
                                                     
     भवदीया,                                                         
 पत्रांक संख्या – NT/Sahara Q/01                                      (डा. नूतन ठाकुर)
 दिनांक – 17 /06/2013                                        5/426, विराम खंड, ,
                                 गोमती नगर, लखनऊ                                 
                                 #  94155-34525                       

2 comments:

  1. But this is copy of your complaint where us copy of the FIR stating police had registered it with the section of IPC

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